Wednesday, January 10, 2018

Maa Ko Bhaj Le Arey Pagle

तर्ज :- ( ग़ज़ल ) कोई आये कोई जाए यह तमाशा क्या है,

माँ को भजले अरे पगले तू सोचता क्या है,
भव से तरने का भला और रास्ता क्या है ||

ख़त का मजुबन लिफ़ाफ़े से समझने वालों,
पढ़ के बतलाओ की तक़दीर में लिखा क्या है ||

अपनी बर्बादी पे पलभर हमें रोने न दिया,
वह समझते नहीं रोने से फायदा क्या है ||

ज़ुल्म सहते हैं बहुत लोग उफ़ नहीं करते,
सर उठा कर जियो मर मर के यह जीना क्या है ||

यह महल तूने बनाये हैं बता जिनके लिए,
पहले किसका है बुलावा तुझे पता क्या है ||

लाख चौरासी योनी भोग कर के नर तन पाया,
बड़ा अनमोल है जीवन को समझना क्या है ||

बाद मरने के "पदम्" याद करेगी दुनिया,
इस ज़माने से क्या लिया है और दिया क्या है ||

-:इति :-



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