Monday, January 29, 2018

Aaj Dekho Shivaalay Mein

तर्ज :- कव्वाली

आज देखो शिवालय में कितने शिव के दर्शन को आये हुए हैं,
बस यही कामना को सजाये हम भी डेरा लगाए हुए हैं ||

चाल बहकी जटाएं भी बिखरी,
झूम कर मस्त डमरू की धुन पर,
इस तरह आ रहे वो जैसे गांजे की दम लगाये हुए हैं || आज ||

छोड़ दो आज नंदी सवारी,
भोले आ जाओ तुम नंगे पाओं,
आइये आपकी राह में हम अपनी पलकें बिछाए हुए हैं || आज ||

जिसने शंकर का गुणगान गाया,
उसने मुँह माँगा वरदान पाया,
ऐसे दानी हैं जो भस्मासुर को भस्म कगन लुटाये हुए हैं || आज ||

हम ना जायेंगे गंगा नहाने,
राज़ की बात है कौन जाने,
"पदम्" मन के मंदिर में हम तो गंगा धारी बसाए हुए हैं 

धर्म पर धन लुटाने जाते हैं, नाम अपना कमाने जाते हैं ||
पाप धुल जाएँ किसी तरह से लोग गंगा नहाने जाते हैं ||

-:इति:-



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