Friday, April 13, 2018

O Kanha re

------ तर्ज:- ओ साथी रे ------
------ फिल्म:- मुकद्दर का सिकंदर ------

ओ कान्हा रे तूने गजब कर दीना,
मुरली बजायी है सुध बिसराई है,
मोरा जिया हर लीना || तूने गजब कर दीना ||

रोज सवेरे पनघट घेरे,
छलिया नटखट सबको छेड़े,
बैंयाँ मरोड़े है मटकी फोड़े है,
दही माखन सब छीना || तूने ||

राह चलत मोरी पकड़े बैंयाँ,
मन की पीर न जानत सैंयां,
कर दियो बावरिया, ऐसा है सावरिया,
मुश्किल कर दियो जीना || तुने ||

मधुबन कितने रास रचाये,
कितनों के तूने काज बनाये,
"पदम्" पुकारे है झोली  पसारे है,
तेरे खजाने में कमी ना || तूने ||

-: इति :-


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