Monday, April 2, 2018

Deva Maanat Nahiya

------ तर्ज - ऐसी दुपहरिया न जाऊं रे डोली ( लोकगीत ) ------

गणपत को कैसे मनाएं रे, देवा मानत नहिंयाँ ||

हाथी और घोड़ा जाको कछु नहीं भाये,
मूषा पे घूमन जाए रे || देवा ||

पेड़ा और बर्फी जाको कछु नहीं भाये,
लड्डूअन का भोग लगाये रे || देवों ||

तीन लोक परिक्रमा न भाये,
मात पिता सर नवाए रे || देवा ||

स्वर्ग की अप्सरा मन नहीं भाये,
रिद्धि सिद्धि संग ब्याहे रे || देवा ||

"पदम्" के विघ्न कलेश न भाये,
विघ्न हरण कहलाये रे || देवा ||

-: इति :-  


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