Friday, September 7, 2018

Mere Bapu Ki Hardam Yeh Aawaz Thi

मेरे बापू की हरदम यह आबाज थी, प्राण जायें तो मेरे बतन के लिये,
हिन्द की सेवा करने में पैदा हुआ, मैं मारूंगा तो मेरे बतन के लिये ||

हाथ में था तिरंगा यह थी आरजू, मरते दम तक तिरंगा न छोडूंगा मैं,
मैं तिरंगे के नीचे ही तोडूंगा दम यह तिरंगा है मेरे कफ़न क लिए ||

मालोजर पर कभी भी न तसब्बुर किया, अपना सब कुछ बतन पर निछावर किया,
एक थी चीज तो पास उनके बची, वह भी खादी की धोती बदन क लिए ||

जान जाये तो जाये मुझे गम नहीं, सर झुकेगा नहीं गैर के सामने,
हर समय प्यारे बापू ने हंस कर कहा सर कता दूंगा अपने वतन के लिए ||

हो मुबारिक बहारें यह आज़ादी की हिन्द के नौजवानों ऐ बीरों तुम्हें,
हर कलि यह कहे धन्य ओ बागवां खून से जिसने सींचा चमन क लिए |

मेरे हिन्दुस्तान की जमीं पे अगर कोई दुश्मन ने डाली जो तिरछी नज़र,
वक़्त आया "पदम्" तो कलम फेंककर मैं उठा लूँगा तलबार रण के लिए ||

-: इति :-


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