Saturday, September 8, 2018

Kahe Bhole

कहे भोले हूँ प्यासा सुनकर यह बाणी,
हो गौरा रानी चली लेने पानी,
प्यासे पिया को चली लेने पानी ||

लेके चली बो खाली गगरिया,
जल की खोज में फिरे बावरिया,
आई सागर के तट पर शिव की दीवानी || हो गौरा ||

भरन लगे जब गौरा गागर,
कोन भरे जल सोचे सागर,
जब देखा है नार नबेली,
रूप मनोहर और है अकेली,
इससे शादी करूं, ऐसी मन में है ठानी || हो गौरा ||

हंस कर बोला पापी सागर,
बात करो कुछ नैन मिलाकर,
कौन हो तुम क्या नाम तुम्हारा,
जल भरना नहीं काम तुम्हारा,
मुझसे शादी करो करो दिल में मेहमानी,
मेरी रानी बनो करो दिल में मेहमानी || हो गौरा ||

पाप जगा सागर के मन में,
गौरा डूब गयी उलझन में,
गौरा यूं सागर से बोली,
क्यों पापी तेरी नीयत डोली,
अरे सागर हुआ तू बड़ा अभिमानी || हो गौरा ||

तू क्या मुझको न पहचाने,
शिव शक्ति को तू न जाने,
नाम तो मेरा पारबती,
भोला शंकर मेरा पति है,
राजा हिमाचल के बेटी हूँ,
अपने पति के संग रहती हूँ,
सब देवों से बो है निराला,
भांग धतूरे को पीने बाला,
मेरे पति को प्यास सताई,
इसलिए मैं जल भरने आई,
पापी तूने सती की कदर न जानी || हो गौरा ||

मन में जगा तेरे पाप बुरा है,
क्यों ले सती का श्राप बुरा है,
दिल में जो तेरे अभिमान रहेगा,
जग में तेरा न सन्मान रहेगा,
बात छोटी सी है बन जाये न कहानी || हो गौरा ||

श्राप सती का जब रंग लाया,
सागर का जब मंथन कराया,
सागर से चौदह रतन निकाले,
विष को पी गए भोले भाले,
देवों ने अमृत को पाया,
सागर का अभिमान मिटाया,
शिव की कृपा तो क्या गम है,
शिव के चरण की धुल "पदम्" है,
इसी कारण हुआ सागर तेरा खारा पानी || हो गौरा ||

-: इति :- 


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