Thursday, January 11, 2018

Bharat Me Jo Lehrayega Yeh Jhanda Tiranga

पन्द्रह अगस्त हिन्द में हर साल आयेगा।
चारों तरफ जय हिन्द का नारा सुनायेगा ।।
जिस वक़्त शहीदों का लब पे नाम आएगा।
शेखर और भगत सिंह की वह याद लायेगा।।
बापू और दीनदयाल के जग गीत गायेगा।
है नाम अमर दुनिया में न मिटने पायेगा।।
वह जलियों वाला बाग तसब्बुर में आयेगा।
वीरों के खून में हर घड़ी उबाल आयेगा।।

भारत में जो लहरायेगा यह झंडा तिरंगा,
तुफानों से टकरायेगा यह झंडा तिरंगा।।

गरचे हमारी राह में तूफा भी आयेंगें
मां तेरे लाल फर्ज से न मुंह छिपायेंगें,
यह नौजवान सर से कफन बांध के निकले
काटों पे भी दीवाने तेरे चलते जायेंगे,
आंधी में भी फहरायेगा यह झंडा तिरंगा,
तुफानों से टकरायेगा यह झंडा तिरंगा ।। भारत।।

ऐ पाक तूने हिन्द का कहना नहीं माना,
भाई बनाके तूने निभाना नहीं जाना,
यह चाल तेरी लाल बहादुर समझ गया,
जिसने कभी भी सर को झुकाना नहीं जाना,
कश्मीर पर फहरायेगा यह झंडा तिरंगा ।। भारत ।।

-: इति :-





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Ek lote ka jal,shiv ko chadate raho

तर्ज:- जिसके सपने हमें रोज़ आते रहे
फिल्म:- गीत 1970

एक लोटे का जल, शिव को, चढ़ाते रहो,सर झुकाते रहो,
हर समस्या का हल और,कोई तो नहीं - 2 
//1//
मस्त गंगा जटों में बहाते हुए,
आयेंगे भोले डमरू बजाते हुए,
उनके डमरू पे दिल को लुटाते रहो,मुस्कुराते रहो।।जग।। 
//2//
उनके द्वारे पे जो भी सवाली गया,
मिल गयी उसको मुक्ति न खाली गया,
मोह माया में न भरमाते रहो,गीत गाते रहो ।। जग ।।
//3//
उनके चरणों में जीवन अर्पण करूं,
आरजू है "पदम्" उनके दर्शन करूं,
शिव की भक्ति का मारग बनाते रहो लौ लगाते रहो।। जग ।।

-: इति :-


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Kanhaiya Meri Laaj Rakho

तर्ज :- मैं एक नन्हा सा बालक हूँ
फिल्म:- हरीशचंद्र तारामति

पापी झूम रहा साड़ी खींच रहा द्रौपदी की,
लुट न जाये शान कन्हैया मेरी लाज रखो - 2 ||

नीच दुशासन भरी सभा में करना चाहे उधारी,
इस पापी से मुझको बचालो मेरे श्याम बिहारी,
मानूंगी तेरा एहसान || कन्हैया ||

तुम बिन मेरा कौन सहारा कृष्णा मुरलिया वाले,
बिगड़ी बनादो धीर बंधादो नाथ कहाने वाले,
दीनों के भगवान || कन्हैया ||

कृष्ण कन्हैया तुमने जगत में लाखों पापी तारे,
मैं अज्ञानी "पदम्" शरण में आया तेरे सहारे,
दे दो मुझे भी वरदान || कन्हैया ||

-: इति :-



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Ganraja Re Lete Hain Pehle Tera Naam Re

तर्ज :- बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे
फिल्म :- एक फूल चार कांटे

गणराजा रे लेते हैं पहले तेरे नाम रे,
हमरे बिगड़े बनादो सारे काम रे ||

शिव शंकर हैं पिता तुम्हारे मात हैं गौरा रानी,
सब देवों में बुद्धि विनायक यह है अमर कहानी,
हमको प्यारा लगे है तेरा धाम रे || गणराजा रे ||

श्री गणराजा के चरणों में अपना शीश झुकाओ,
रिद्धि और सिद्धि के दाता भव से पार लगाओ,
अब जो भी होगा अंजाम रे || गणराजा रे ||

एक दन्त हो दयावंत हो लेलो खबर हमारी,
गिरिजा नंदन असुर निकंदन "पदम्" चरण बलिहारी,
तेरा नाम जपे सुबह शाम रे || गणराजा रे ||

-:इति:-




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Wednesday, January 10, 2018

Jis Din Bhi Bharat Me Hindi Ko Naman Hoga

तर्ज :- ओठों को छूलो तुम
तर्ज़:- श्री राम से कह देना एक बात अकेले में

जिस दिन भी भारत में हिंदी को नमन होगा,
उस दिन उस पल मेरा खुशहाल वतन होगा ||

अंग्रेजों की अंग्रेजी न साथ गयी उनके,
अंग्रेजी को अपनाना हिंदी का पतन होगा || जिस ||

हिंदी है न हिन्दू की हिंदी न मुसलमाँ की,
यह राष्ट्र की भाषा है यही राष्ट्र का धन होगा || जिस ||

कश्मीर की घाटी से जब कन्याकुमारी तक,
घर घर हर दफ्तर में हिंदी का चलन होगा || जिस ||

हिंदी का है पखवाड़ा हर साल मनाते रहें,
यही "पदम्" प्रतिदिन हो ऐसा किस दिन होगा || जिस ||

जब भारत माता को कहते हैं मदर इंडिया,
कब लक्ष्य को पायेंगे कब चैन अमन होगा || जिस ||

-:इति:-



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Miya Yaad Rakhoge Ya Bool Jaoge

तर्ज:- बतादूं क्या लाना
फिल्म:- पत्थर के सनम 1967

महंगाई का ज़माना थोड़ी रकम कमाना,
इसमें है घर चलाना पिया याद रखोगी या भूल जाओगे,
नारी का है ज़माना सौंपो मुझे घराना,
घर पूरी तनखा लाना मिया याद रखोगे या भूल जाओगे ||

जब पहली हो सीधे घर आना एरों गैरों का बिल न चुकाना,
दूध शक्कर लेने मै जाउंगी नाश्ते में हलवा खिलाऊँगी,
दो दिन मज़ा उड़ाना पूड़ी अगर हो खाना,
तुम डालडा ले आना || मियां ||

मुन्ना के लिए पेंट चाहिए, मकानदार को रेंट चाहिए,
फट गयी फ्रॉक छोटी बेबी की पुस्तक भी लाना शीला देवी की,
एक मेरी साड़ी लाना ब्लाउज न भूल जाना,
यह छोटा सा नजराना || मियां ||

इस तरह नहीं हो घर का गुज़ारा परिवार नियोजन का है यही नारा,
जिस घर में एक-दो बच्चे हैं इसमें शक नहीं वह बड़े अच्छे हैं,
अंकुश पड़े लगाना, बेटी को है बचाना
यह "पदम्" का फ़साना || मियां ||

-:इति:- 


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Maa Ko Bhaj Le Arey Pagle

तर्ज :- ( ग़ज़ल ) कोई आये कोई जाए यह तमाशा क्या है,

माँ को भजले अरे पगले तू सोचता क्या है,
भव से तरने का भला और रास्ता क्या है ||

ख़त का मजमून लिफ़ाफ़े से समझने वालों,
पढ़ के बतलाओ की तक़दीर में लिखा क्या है ||

अपनी बर्बादी पे पल भर हमें रोने न दिया,
वह समझते नहीं रोने से फायदा क्या है ||

ज़ुल्म सहते हैं बहुत लोग उफ़ नहीं करते,
सर उठा कर जियो मर मर के यह जीना क्या है ||

यह महल तूने बनाये हैं बता जिनके लिए,
पहले किसका है बुलावा तुझे पता क्या है ||

लाख चौरासी योनी भोग कर के नर तन पाया,
बड़ा अनमोल है जीवन को समझना क्या है ||

बाद मरने के "पदम्" याद करेगी दुनिया,
इस ज़माने से क्या लिया है और दिया क्या है ||

-:इति :-



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Kehte Hain Chaar Din Ki Teri Hai Zindagaani

तर्ज :- भारत की है कहानी, सदियों से है पुरानी
  (महाभारत टी. वी सीरियल)

भव सागर का रूप हैं यह सारा संसार,
पाप डुबोये भँवर में धर्म उतारे पार,
आइये श्री राम के चरणों में शत शत करें वंदन,
करें वंदन करें वंदन करें वंदन,
श्री राम को सुमरले मोह माया तज के प्राणी,
कहते हैं चार दिन की तेरी हैं जिन्दगानी ।। सिया रामा -3।।

क्या सोचता है मन में आ राम की शरण में,
सब यार हैं मतलब के दुनिया है आनी जानी ।। कहते ।।

चौरासी का सफर है पल की नहीं खबर है,
जीवन का मूल क्या है एक बुलबुला है पानी ।। कहते ।।

यह राम जन्म भूमि जन जन की कर्म भूमि,
मन्दिर वहीं बनेगा हमने भी दिल में ठानी ।। कहते ।।

विनती है यह 'पदम’ की नहीं चाह माल धन की,
दीदार तेरा पाऊं हो जाये मेहेरबानी ।। कहते ।।

-: इति :-



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Ganga Teri Jaton Me Behti Sheesh Pe Chanda Aala

तर्ज़:- गंगा मेरी मां का नाम,बाप का नाम हिमाला
फिल्म:- तुम से अच्छा कोन है
गंगा तेरी जटों में बहती शीश पे चन्दा आला,
वह सब देवों में भोला है नाम है भोला भाला ।

तन पे ओढ़े हैं मृग छाला नन्दी पर असबार,
बृम्हा विष्णु सब उनकी माया से पाये हार,
कोई न जाने शिव शंकर की लीला अपरम पार। गंगा।

डमरू बजा कर नाच रहे हैं वह शिव शंकर भोले,
गांजा पीवे पियें धतुरा खाए भांग के गोले,
नाच तुम्हारा देख देख कर इन्दर का मन डोले । गंगा

मूँह माँगा वरदान लुटाये भोले शिव करतार,
खाली ना जाए कोई सबाली ऐसो है दरबार,
मिलेगी मुक्ति "पदम्" को आजा कैलाशी के द्वार । गंगा

-: इति :-


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Sunday, January 7, 2018

Draupadi Kehne Lagi Krishna Bhaiya Se


तर्ज :- कव्वाली

द्रोपदि कहने लगी कृष्ण भैया से यूं,
चीर खीचे दुशासन गजब हो गया,
पापी के हाथों से एक अबला का यूं,
नग्न होता है यौवन गजब हो गया।।

 पांचो पांडव जुए में मुझे हार कर,
आज बैठे हुए हैं यह मन मार कर,
तेरी बहना की अस्मत लुटी जा रही है,
सामने बैठे अर्जुन गजब हो गया ।। द्रौपदी ।।

जबकि प्रहलाद ने ध्यान तेरा किया,
खम्ब से तुमने उसको बचा ही लिया,
लाज मेरी कन्हैया तेरे हाथ है,
बड़ा व्याकुल है यह मन गजब हो गया ।। द्रौपदी ।।

वह सभा में खड़ी द्रौपदी रो रही है,
अश्रु धारा से वह अपना मुख धो रही है,
इस तरह तुमसे रो रो के विनती करे,
ज्यो बरसता है सावन गजब हो गया।। द्रोपदि।।

खींचते खींचते  जब दुशासन थका,
दुष्ट द्रोपदि नग्न फिर भी कर न सका,
धीर मन को हुआ सोचा द्रोपदि ने यूँ,
अा गया मेरा मोहन गजब हो गया ।। द्रोपदि।।

लाख चौरासी के नर का जीवन मिले,
किस तरह से कन्हैया का दर्शन मिले,
मुरली वाले के चरणों में हमने "पदम्"
ज़िन्दगी कर दी अर्पण गजब हो गया ।। द्रौपदी ।।

-:इति :-

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Maiya gaura Ke gajanand Laadle

तर्ज :- (जस)
मैया झूले गजानंद पालना हो मां 
मैया गौरा जी के लाल,भुवन में
झूले गजानंद पालना हो मां 
भजन
 मैया गौरा के गजानंद लाडले हो माँ,
मैया प्रथम पूजा होय ,जगत में
गौरा के गजानंद लाडले हो मां || मैया गौरा के ||

शंकर सुमन भवानी के नंदन,
मोह माया के काटो बंधन,
कर दइयो उपकार,जगत में
गौरा के गजानंद लाडले हो मां||मैया गौरा के ||


ध्यान धरुं देवा गणपति को,।
चरण पढूं ऋद्धि सिद्धि को,
दया करो दातार ,जगत में
गौरा के गजानंद लाडले हो मां|| मैया गौरा के ||

चार भुजा धारी गनराजा,
भव से नैया पार लगाजा,
मुषे पे असवार ,जगत में 
गौरा का गजानंद लाडले हो मां|| मैया गौरा के ||

"पदम्" सुमर तुमरे जस गाऊँ,
गुड़ के मोदक भोग लगाऊं,
कर लइयो स्वीकार ,जगत में
गौरा के गजानंद लाडले हो मां|| मैया गौरा के ||

-: इति :-


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Saturday, January 6, 2018

Hari Om Naam Ka Sumiran Karle

तर्ज :- जहां डाल डाल पर सोने को चिड़िया करती बसेरा
फिल्म - सिकंदर-ए-आज़म

हरि ॐ नाम का सुमिरन करले मन का मिटे अंधेरा,
जग चिड़िया रैन बसेरा, जग चिड़िया रैन बसेरा ||

जब लख चौरासी भोग लिया तब तूने नर तन पाया || हरि ॐ ||
किया कोल गर्म में माता के उसको तूने विसराया - 2
यूं छल ओर कपट में खर्च हुआ अनमोल रतन धनतेरा || जग ||

इसे आना है उसे जाना है दुनिया है मुसाफिर खाना || हरि ॐ ||
जिस दिन पिंजरा खुल जायेगा इस पंछी को उड़ जाना -2
सब ठाठ पड़ा रह जाएगा न तेरा है न मेरा || जग ||

यह "पदम" फंसा है भव सागर में नैया डगमग डोले || हरि ॐ ||
नहीं कोई सहारा दूर किनारा ओ शिव शंकर भोले -2
प्रभु दया करो सब पाप हरो चरणों मे डाला डेरा || जग ||

-: इति :-


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Bhole Baba Ko Ab Pranam Kiya Jaye

तर्ज :- मार दिया जाए छोड़ दिया जाए
फ़िल्म :- मेरा गाँव मेरा देश

ध्यान किया जाए , गुणगान किया जाए,
भोले बाबा को अब प्रणाम किया जाए ||

तेरी पूजा तेरी वंदना क्या है,
भोले बाबा की आराधना क्या है,
मैं ना जानू तेरी साधना क्या है,
मान किया जाए फिर सम्मान किया जाए || भोले ||

शान जग से निराली तुम्हारी है,
तुमने भक्तों की विपता को टारी है,
नंदी पर आपकी ही सवारी,
ज्ञान लिया जाए वरदान लिया जाए || भोले ||

शीश पर उनके गंगा की धारा है ,
कर में डमरू और त्रिशूल न्यारा है,
"पदम" भक्तोँ का वह सहारा है,
नाम लिया जाए दिल थाम लिया जाए || भोले ||


-: इति :-

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Jai Jai Bolo Shree Ram ki

तर्ज :- गड्डी चली है छलांगा
फ़िल्म :- दादा


करो तैयारी अयोध्या धाम की,
जै जै बोलो श्री राम की,
छोड़ो आपस की तकरार हिन्दू हो जाओ तैयार ,
अब कसम है तुम्हें राम की || जय जय बोलो श्री राम की ||


राम शिलायें बुला रही है राम के दीवानों को,
बजरंग दल और शिवसेना के बाँके मर्दानों को,
विश्व हिन्दू परिषद का बस एक है मकसद,
आरज़ू है मंदिर निर्माण की  ||


कितने राम के दीवानों ने अपना खून बहाया,
राम का नाम ले एक भगत ने झंडा जब फहराया,
उसकी भक्ति महान देखे सारा हिंदुस्तान,
यह तो महिमा है प्रभु के नाम की ||


राम जन्म की भूमि पर अब राम का मंदिर होगा,
इस मंदिर की छटा देख कर स्वर्ग निछावर होगा,
गूंजे राम की जयकार, ढोल मंजीरों की झंकार,

"पदम" आरती हो सुबह शाम की ||

-: इति :-

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Insaan Hain Par Insaan Nahi

तर्ज :- कव्वाली

बेईमान हैं यह क्योंकि मेरे ईमान के दुश्मन बैठे हैं,
इंसान हैं पर इंसान नही इंसान के दुश्मन बैठे हैं ||

पहले तो हमें अपना कहकर धोके में हमको डाल दिया ,
अब सामने वो इस तरह से मेहमान के दुश्मन बैठे हैं ||

पांचों भाई लाचार हुए द्रौपदी की बाज़ी हार गए ,
बेचारी अबला द्रौपदी की  यह शान के दुश्मन बैठे हैं  ||

सोचा न "पदम" उस पापी ने द्रौपदी है मोहन की बहना ,
आखिर में पड़ी मुंह की खानी जो भगवान के दुश्मन बैठे हैं ||

-: इति :-
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Bhola Nath Nirala

तर्ज - मेरा प्यार भी तू है यह बहार भी तू है
फिल्म- साथी 1968

भोला नाथ निराला सारे देवों में आला,
डाले गर्दन में नागों की माला,
गंगा धारी है त्रिपुरारी है 


अंग भवुती है तन मृग छाला, नंदी पर बैठे कैलाशी,
हाथ में डमरू बाज रहा है, शीश पे चंदा है अविनाशी,
हैं घट के वासी । भोला

भस्मासुर को कंगन दीना रावण को लंका दे डाली,
मुंह माँगा वरदान लुटाकर, पर्वत शिव ने धूनी रमाली,
क्या है माया निराली । भोला

नर तन जग में तूने पाया ना कर मूरख तू नादानी,
उनके दर से मांगले मुक्ति, मेरे भोले हैं वरदानी,
कह गए "पदम्" यूँ ज्ञानी । भोला

-: इति :-

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Wo hain Bade Gyani Devon Ke Sartaj

तर्ज : - जा रे कारे बदरा 
फिल्म :- धरती कहे पुकार के 

मुषे अलबेला विराजे गणराज,
वो हैं बड़े ज्ञानी देवों के सरताज 


कहते हैं उनको उमा के दुलारे,
वो हैं भोले बाबा की आँखों के तारे,
बिगड़ी बनायें बचाएं वो ही लाज । वो हैं

सभी देवताओं से पहले मनाएं,
ऋषि और मुनि उनके गुणगान गायें,
बड़ी शान बोले सुरों के महाराज । वो हैं

संग में हैं उनके रहें रिद्धि सिद्धि,
भजले "पदम्" तो मिले ज्ञान बुद्धि,
उनकी दया से बनेंगे सब काज । वो हैं

-: इति :-


 
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Friday, January 5, 2018

Janamdin Tumhara Manate Hain Hum

तर्ज :- बहुत प्यार करते हैं
फिल्म:- साजन

जनम दिन तुम्हारा मनाते हैं हम,
नेहा तुम्हारी न हों खुशियाँ कम 

मम्मी की आँखों का तारा बनोगी,
पापा के दिल का सहारा बनोगी,
परियां भी गुड़िया के चूमे कदम । जनम

चाचा और चाची देते दुहाई,
मामा और मामी ने आशा लगायी,
करे नाना नानी के नाक में दम । जनम

काजल लगा दो नज़र लगे ना,
जहाँ भी रहे तू सदा मुस्कुराना,
तेरी ज़िन्दगी से रहे दूर गम । जनम

दादा और दादी की ममता मिलेगी,
जीवन में तुमको सफलता मिलेगी,
सदा खुश रहो ये दुआ है "पदम्" । जनम

-: इति :-

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Ek Saal Hi Beet Gaya Naya Saal ke Aane Me

तर्ज : - ओठों को छूलो तुम
फिल्म:- प्रेम गीत
तर्ज़:- श्री राम से कह देना एक बात अकेले में
।। नए बर्ष का गीत।।

एक साल ही बीत गया नई साल के आने में,
सब लोग हैं दीवाने यहां खुशियां मनाने में।

चौबीस विदा करदो, पच्चीस का स्वागत हो ।
है मस्त युवा पीड़ी कहीं नाचने गाने में।

नया साल हो मंगल मय , नया साल हो सुखदायी,
जन जन को राह मिले मंजिल को पाने में

कुछ लोग पुराने हैं कुछ लोग नये आये,
मुन को सुख मिलता है यूंही मिलने मिलाने में।


फिर से न हो बरबादी कोरोना की विप्ता से,
सुख चैन अमन बरसे अब ‘पदम’ जमाने में।

-: इति :-

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Thursday, January 4, 2018

Ram Tera Beda Lagaenge Paar

तर्ज :- एक दो तीन चार पांच छे
फिल्म :- तेज़ाब


एक श्री राम सांचा लगे रे मोहे,
और दुजा नाम झूठा लगे,
आओ करें निस दिन जयकार,
राम तेरा बेड़ा लगाएंगे पार।

इनकी शरण में जो अइबे नही,
जीवन सफल हुइबे नही,
है ऐसी माया श्री राम की,
पानी मे पत्थर भी डूबे नहीं,
गाये तेरी महिमा संसार । राम

पहुँचे थे गंगा किनारे हरी,
केवट ने आने में देरी करी,
बोला तुम्हारे है चरणों में क्या,
पत्थर की सिल्ला भी नारी बनी,
पहले लूँगा पैंया पखार । राम

गोते लगाये है गंगा जमन,
मलमल के धोया है यह तन बदन,
सुन्दर है माटी का पुतला ‘पदम',
भीतर से देखातो काला है मन,
राम नाम मुख से उचार । राम


-: इति :-

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