Tuesday, November 13, 2018

Bajrang Ka Dhaam Albela

------ तर्ज :- ऐसी दुपरिया न जाऊं रे डोली ------

बजरंग का धाम अलबेला, लगे भक्ति का मेला,
राम नाम अलबेला, यह है मुक्ति का मेला ।।

कोई कहे बजरंगी आला, कोई कहे अंजनी लाला,
राम को भगत अकेला ।।

सीता राम लखन मन लाई, तुमने छाती फाड़ दिखाई,
खेल अजब तुमने खेला ।।

रावण पूंछ में आग लगाई, तुमने उसकी लंका जलाई,
नहले पे पड़ गया दहला ।।

हनुमत के गुण गाओ प्राणी, "पदम" यही सन्तों की बाणी,
जग है झूठा झमेला ।।

-: इति:-


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