------ दोहा ------
शिव शम्भू दूल्हा बने, लेकर चले बारात,
अम्बर से होने लगी फूलों की बरसात
मैनावत द्वारे खड़ेऔघड़ दीना नाथ,
भावर परिक्रमा लई ,गौरा जी के साथ
तर्ज़:- ठुमक ठुमक मैया आ जइयो
आई है पूजा की बेला रे,लगो नो दिन को मेला
;;शिव रात्रि भजन;;
दूल्हा बने भोले बाबा रे,गौरा बन गई दुल्हनिया
हां हां रे गौरा बन गई दुल्हनिया ।।
गांजे की जो चिलम चढ़ाये, भंगिया लोटन से पी जाये,
अंग लपेटे एक मृग छाला, गर्दन में नागों की माला,
जटों में गंगा मैया री - 2 ||गौरा बन गई||
ना है बाप, ना है महतारी, ना घर द्वार, न महल अटारी,
पर्वत पे टूटी मड़ैया री - 2 ||गौरा बन गई ||
हल्दी, उबटन न तेल चढ़ायो, तन पे भबूत लगाके आयो,
पांव न पैरी पनैया री -2 ||गौरा बन गई||
हाथी, घोड़ा कछु न लायो, बड़े बैल पे बैठ के आयो,
कानों में लटके ततैया री - 2 ||गौरा बन गई||
ब्रह्मा, विष्णु संगी साथी, भूत बेताल बने बाराती,
चुड़ेलें नचे ताता थैया री -2 ||गौरा बन गई||
छुड़ेंले बन गई नचनिया रे।।गौरा बन गई ।।
गौरा ने एकऊं न मानी, शिव की हो गयी प्रेम दीवानी,
"पदम्" पड़ो इनके पैयारी - 2 ||गौरा बन गई ||
-: इति :-






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