Sunday, March 25, 2018

Shiv Shambhu Dulha Bane

------ तर्ज - लोकगीत ------

शिव शम्भू दूल्हा बने, लेकर चले बारात,
अम्बर से होने लगी फूलों की बरसात,
गौरा तेरो सैंयारी - राम दई अच्छो नैया री,
अच्छो अच्छो नैयारी - प्यारो प्यारो नैया री,

गांजे की जो चिलम चढ़ाये, भंगिया लोटन से पी जाये,
अंग लपेटे एक मृग छाला, गर्दन में नागों की माला,
जटों में गंगा मैया री - 2 || राम दई ||

ना है बाप, ना है महतारी, ना घर द्वार, न महल अटारी,
पर्वत पे टूटी मड़ैया री - 2 || राम दई ||

हल्दी, उबटन न तेल चढ़ायो, तन पे भबूत लगाके आयो,
पांव न पैरी पनैया री -2 || राम दई ||

हाथी, घोड़ा कछु न लायो, बड़े बैल पे बैठ के आयो,
कानों में लटके ततैया री - 2 || राम दई ||

ब्रह्मा, विष्णु संगी साथी, भूत बेताल बने बाराती,
चुड़ेलें नाचे ताता थैया री -2 || राम दई ||

गौरा ने एकऊं न मानी, शिव की हो गयी प्रेम दीवानी,
"पदम्" पड़ो इनके पैयारी - 2 || राम दई ||

-: इति :- 


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