Saturday, December 30, 2017

Gajanand Tumhari Sharan Chahiye

तर्ज - दीवाने हैं दीवानों को न घर चाहिए
फिल्म - ज़ंजीर

सबाली हूँ। सबाली को ना फन चाहिये न धन चाहिये,
गज़ानन्द तुम्हारी शरण चाहिये - 2 ।

कोई रिद्धि सिद्धि के दाता कहें - 2,
कोई ज्ञान बुद्धि विधाता कहें - 2,
तुम्हारे गुण गायें ऐसा मन चाहिये न धन चाहिये । गजानन्द।

माँ गौरा की आँखों के तारे हो तुम - 2,
पिता भोले शिव को दुलारे हो तुम – 2,
गुणों के गणराजा के भजन चाहिये न धन चाहिये । गजानन्द।


करू में तुम्हारी प्रथम वन्दना - 2,
यह सच है ना जानू तेरी साधना - 2,
‘पदम’ को तेरी भक्ति की लगन चाहिये न धन चाहिये । गजानन्द ।

-: इति :-

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