Tuesday, October 20, 2026

jyoti nau din jali,maa dasham din chali

       तर्ज:- एक डोली चली,एक अर्थी चली

         //  मां का विसर्जन गीत //

      ज्योति नौ दिन जली, माँ दशम दिन चली ।


     लो चली मां चली , मां विषर्जन चली ।।

(1)   द्वार मा का सजा,मा की पूजन करी ।

        मा ने संकट हरे,सबकी झोली भरी ।

       मां को जिसने भजा,उसकी विपता टली।।

      ।। लो चली मां चली माँ विसर्जन चली।।

  ,(2) हर बर्ष आना मां,हर एक नवरात में

       जागरण हम करे, मां के जगरात में

      मा से शक्ति मिली, मां से भक्ति मिली ।।

     ।।लो चली मां चली मां विसर्जन चली।।

(3) माता ओर बेटे का नाता टूटे नहीं

     है शरण में "पदम",साथ छुटे नहीं

    सबका करती भला,मैया ऐसी भली ।।

    ।। लो चली मां चली मां विसर्जन चली।।

                 //इति//

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