Sunday, November 25, 2018

Panghat Se Daudi Chali Aaungi

------ तर्ज :- मंदिर से दौड़ी चली आउंगी ------

पनघट से दौड़ी चली आउंगी, कान्हा मुरली बजादो,
मधुबन में रास रचाऊंगी, कान्हा मुरली बजादो ।।

श्याम सुंदर से लागे नैना,
तुम बिन हमको चैन पड़े ना,
तुम संग प्रीति निभाऊंगी ।। कान्हा ।।

नंदलला की सांवरी सूरत,
चंचल चितवन मोहिनी मूरत,
माखन मिश्री खिलाऊंगी ।। कान्हा ।।

तुमने मुरली मधुर बजायी,
तन मन की मैंने सुध बिसराई,
समझे ना पीर परायी।। कान्हा ।।

श्याम पिया का मिले जो दर्शन,
"पदम" ने जीवन कर दिया अर्पण,
मन मंदिर में बसाउंगी ।। कान्हा ।।

-: इति :-


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