Monday, November 26, 2018

Gaura Ne Ghont Kar

 ------तर्ज:- मेरे रश्के कंवर -----

गौरा ने घोंट कर, पीस कर छान कर |
शिव को भंगिया पिलाई, मजा आ गया ||
छोड़ कैलाश को पहुंचे शमशान में |
गांजे की दम लगायी, मजा आ गया ||

जब नशा भांग गांजे का चढ़ने लगा 
भोला नचने लगे, डमरू बजने लगा
जल चुकीं थी चिताएं जो शमशान में
उनकी भस्मी रमाई, मजा आ गया ||

बदी फागुन चतुर्दश तिथी  आई है,
शिव से गौरा मिलन की घड़ी  आई है
शिवजी दूल्हा बने गौरा दुल्हन बनीं
ऐसी शादी रचाई || मजा आ गया ||

भोला धनवान हैं न तो कंगाल हैं
शिव महादेव हैं, शिव महाकाल हैं
शिव के चरणों में हम, आ गये हैं "पदम्" राह मुक्ति की पाई || मजा आ गया ||

-: इति :-



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